कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट
कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट =========================== एक महत्वपूर्ण फैसले में गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution Of Conjugal Rights) के लिए पति द्वारा दायर मुकदमे में एक महिला को अदालत की डिक्री (आदेश) के माध्यम से भी अपने पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निराल मेहता की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए एक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसके तहत एक मुस्लिम महिला को अपने ससुराल वापस जाने और अपने पति के साथ वैवाहिक दायित्व निभाने का निर्देश दिया गया था। संक्षेप में मामला फैमिली कोर्ट (गुजरात में बनासकांठा जिला) के समक्ष प्रतिवादी-पति का मामला यह था कि उसकी पत्नी (जिसके साथ उसने वर्ष 2010 में निकाह किया था) उसने बिना किसी उचित कारण के और बिना किसी को बताए ही 20 जुलाई 2017 को उनके नाबालिग बेटे के साथ अपना वैवाहिक घर छोड़ दिया था। अदालत के समक्ष आगे यह तर्क दिया गया कि पत्नी को वैवाहिक घर में वापस लाने के लिए उसने...