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Showing posts from December, 2021

कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट

कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट =========================== एक महत्वपूर्ण फैसले में गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली (Restitution Of Conjugal Rights) के लिए पति द्वारा दायर मुकदमे में एक महिला को अदालत की डिक्री (आदेश) के माध्यम से भी अपने पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।  जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस निराल मेहता की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए एक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसके तहत एक मुस्लिम महिला को अपने ससुराल वापस जाने और अपने पति के साथ वैवाहिक दायित्व निभाने का निर्देश दिया गया था।  संक्षेप में मामला  फैमिली कोर्ट (गुजरात में बनासकांठा जिला) के समक्ष प्रतिवादी-पति का मामला यह था कि उसकी पत्नी (जिसके साथ उसने वर्ष 2010 में निकाह किया था) उसने बिना किसी उचित कारण के और बिना किसी को बताए ही 20 जुलाई 2017 को उनके नाबालिग बेटे के साथ अपना वैवाहिक घर छोड़ दिया था।  अदालत के समक्ष आगे यह तर्क दिया गया कि पत्नी को वैवाहिक घर में वापस लाने के लिए उसने...

सीआरपीसी की धारा 438: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत के लिए पहला आवेदन खारिज होने के बाद दूसरा आवेदन दाखिल करने की प्रैक्टिस की निंदा की

सीआरपीसी की धारा 438: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत के लिए पहला आवेदन खारिज होने के बाद दूसरा आवेदन दाखिल करने की प्रैक्टिस की निंदा की ========================= सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करने वाली एक विशेष अनुमति याचिका पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत के लिए पहला आवेदन खारिज होने के बाद दूसरा आवेदन दाखिल करने की प्रैक्टिस की निंदा की। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस एएस ओका की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर, 2020 को याचिकाकर्ता के पहले आवेदन को सीआरपीसी की धारा 438 के तहत खारिज किया था। कोर्ट ने आगे उल्लेख किया कि इसके अनुसरण में धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत की मांग करने वाला दूसरा आवेदन दाखिल करते समय रिकॉर्ड पर रखी गई परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं था, जिसे 2 अगस्त, 2021 को खारिज कर दिया गया था।  विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता के वकील उच्च न्यायालय के समक्ष सीआरपीसी की धारा 438 के तहत दूसरा आवेदन दाखिल करने के अधिकार क्षेत्र को लागू करने के लिए परिस्थितियों में कोई बदलाव दिखाने मे...

Procedure To File Complaint Under Consumer Protection (Amendment) Act, 2019 in India

The Consumer Protection Act, 2019 ("New Act") got presidential assent on 9th August 2019, and the same came into effect from 20th July 2020 replacing the old Consumer Protection Act, 1986 ("Old Act"). The purpose of the act is to protect the interest of the consumers and to provide effective and timely settlement of dispute, connected to consumers. The New Act introduced the online filing of complaint and meditation proceeding for the speedy and effective disposal of consumer cases. Under Section 2 (6) of New Act, Complaint is defined as any allegation in writing, made by a complainant for obtaining the relief provided under the act in case of unfair trade practices, defects in goods, deficiency in service, excess price of goods and services, selling of hazardous goods. Complainant can also claim product liability against the manufacturer or service provider. The New Act introduces the provision for "Product Liability" under which manufacturer/ service pro...